मंगलवार 21 जुलाई 2026 - 04:15
क़ुम अल मुक़द्देसा में गैर-ईरानी उलेमा और छात्रों की ओर से शहीद रहबर की मजलिस-ए-तरहीम

क़ुम अल मुक़द्देसा में हौज़ा-ए-इल्मिया से जुड़े गैर-ईरानी उलेमा और छात्रों की ओर से शहीद रहबर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई (क़) तथा उनके शहीद परिजनों की याद में हज़रत मासूमा (स) के हरम में एक मजलिस-ए-तरहीम आयोजित की गई।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व-प्रसिद्ध शिया मरजा-ए-तक़लीद और उम्मत-ए-इस्लामी के महान रहबर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई (क़) तथा उनके शहीद परिजनों की स्मृति में क़ुम मुक़द्दसा में एक मजलिस का आयोजन किया गया।

इस मजलिस का आयोजन हौज़ा-ए-इल्मिया के अंतरराष्ट्रीय विभागों, जामिअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया के अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, विश्व परिषद तक़रीब-ए-मज़ाहिब-ए-इस्लामी, विश्व अहल-ए-बैत परिषद, इस्लामी संस्कृति एवं संचार संगठन तथा हज एवं ज़ियारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से किया गया। यह कार्यक्रम शनिवार, 18 जुलाई 2026 को मग़रिब और इशा की नमाज़ के बाद क़ुम में हज़रत मासूमा (स.) के हरम के शबिस्तान-ए-इमाम ख़ुमैनी में आयोजित हुआ।

सभा में हौज़ा-ए-इल्मिया के उलेमा, शिक्षक, गैर-ईरानी छात्र-छात्राएँ तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। आध्यात्मिक वातावरण में क़ुरआन मजीद के पाठ और मर्सिया-ख़्वानी के माध्यम से शहीद नेता की याद को ताज़ा किया गया।

मजलिस-ए-ख़ुबरेगान-ए-रहबरी के सदस्य आयतुल्लाह मोहसिन अराकी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि शहीद नेता ने इंक़िलाब के माध्यम से इमाम हुसैन (अ) की शहादत की भावना और ऊर्जा को जीवित किया। उन्होंने कहा कि इतिहास के विभिन्न दौरों में कभी-कभी हुसैनी समाज की गर्मजोशी और जोश में कमी आ जाती है। ऐसे समय में इमाम हुसैन (अ.) जैसी महान शहादत का रक्त नई प्रेरणा देता है, जिससे शहादत का एक नया आंदोलन जन्म लेता है, जो समाजों को नई गति प्रदान करता है और मनुष्य की फ़ितरत को फिर से जीवित कर देता है।

आयतुल्लाह अराकी ने कहा कि शहीद नेता के प्रतिशोध का प्रयास वास्तव में दुनिया में न्याय और सद्गुण की स्थापना का प्रयास है। उन्होंने आगे कहा कि यदि कुफ्र के नेताओं को दंड दिए बिना छोड़ दिया जाए, तो न केवल दुनिया अत्याचार से भर जाएगी बल्कि अत्याचार ही दुनिया का सबसे बड़ा मूल्य बन जाएगा।

उन्होंने कहा कि शहीद नेता का प्रतिशोध इमाम ज़माना (अ) के ज़ुहूर की भूमिका तैयार करने का माध्यम और हमारी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अहल-ए-ईमान के समाज और प्रतिरोध मोर्चे की सबसे महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी और धार्मिक कर्तव्य प्रतिशोध के लिए प्रयास करना है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा प्रतिशोध केवल ट्रम्प से ही नहीं, बल्कि उसके सभी साथियों और यहाँ तक कि उसके सैनिकों से भी है।

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